उद्योगपर्व — अध्याय १३५: कुन्त्याः कृष्णं प्रति संदेशः
Kuntī’s Message to Kṛṣṇa
जयो नामेतिहासो<यं श्रोतव्यो विजिगीषुणा । महीं विजययते क्षिप्रं श्रुत्वा शत्रृंक्ष मर्दति,यह जय नामक इतिहास है। विजयकी इच्छा रखनेवाले पुरुषको इसका श्रवण करना चाहिये। इसे सुनकर युद्धमें जानेवाला राजा शीघ्र ही पृथ्वीपर विजय पाता और शत्रुओंको रौंद डालता है
นี่คืออิติหาสชื่อว่า “ชัย” ผู้ใฝ่ชัยชนะพึงสดับเรื่องนี้ ครั้นได้ฟังแล้ว พระราชาผู้ยกทัพสู่สงครามย่อมได้ชัยเหนือแผ่นดินโดยเร็ว และย่ำยีศัตรูให้ราบคาบ
पुत्र उवाच