Rāma–Jāmadagnya-janma-kāraṇa and Kṣatra-kṣaya
Paraśurāma’s origins and the depletion/restoration of kṣatriya lineages
ऋचीक उवाच नैष संकल्पित: कामो मया भठद्रे तथा त्वयि । उग्रकर्मा समुत्पन्नश्नरुव्यत्यासहेतुना,ऋचीक बोले--कल्याणि! मैंने यह संकल्प नहीं किया था कि तुम्हारे गर्भसे ऐसा पुत्र उत्पन्न हो। परंतु चरु बदल जानेके कारण तुम्हें भयंकर कर्म करनेवाले पुत्रको जन्म देना पड़ रहा है
ฤจีกะกล่าวว่า— “โอ้ภัทรา! เรามิได้ตั้งปณิธานเช่นนั้นไว้แก่เจ้าเลย แต่เพราะการสลับจรุ จึงจักมีบุตรผู้ประกอบกรรมอันดุร้ายบังเกิดขึ้น”
ऋचीक उवाच