अध्याय ३५१ — उञ्छवृत्ति-व्रतसिद्धेः मानुषस्य परमगतिः
Sūrya–Nāga Dialogue on the Perfected Gleaner-Ascetic
पराशरस्य दायाद: कृष्णद्वैपायनो मुनि: । भूयो नारायणसुतं त्वमेवैनं प्रभाषसे,जनमेजयने कहा--द्विजश्रेष्ठस आपहीने पहले आदिपर्वकी कथा सुनाते समय यह कहा था कि वसिष्ठके पुत्र शक्ति, शक्तिके पुत्र पराशर और पराशरके पुत्र मुनिवर श्रीकृष्णद्वैपायन व्यास हैं और अब पुन: आप इन्हें नारायणका पुत्र बतला रहे हैं
Janamejaya uvāca | Parāśarasya dāyādaḥ Kṛṣṇadvaipāyano muniḥ | Bhūyo Nārāyaṇasutaṃ tvam evainaṃ prabhāṣase ||
ชนเมชยะกล่าวว่า “ฤๅษีกฤษณทไวปายนะ (วยาสะ) เป็นทายาทและเชื้อสายของปราศระอยู่แล้ว แต่บัดนี้ท่านกลับกล่าวถึงท่านผู้นั้นว่าเป็นโอรสของนารายณะอีกครั้ง เรื่องนี้พึงเข้าใจอย่างไร?”
जनमेजय उवाच