Adhyāya 270 — Yudhiṣṭhira’s inquiry on saṃnyāsa; Bhīṣma on calculable time, tamas, and karma
Vṛtra–Uśanā exemplum begins
कुण्डधार उवाच यदि प्रसन्ना देवा मे भक्तो<यं ब्राह्मणो मम । अस्यानुग्रहमिच्छामि कृतं किंचित् सुखोदयम्,कुण्डधार बोला--यह ब्राह्मण मेरा भक्त है। यदि देवतालोग मुझपर प्रसन्न हों तो मैं इसके ऊपर उनका ऐसा अनुग्रह चाहता हूँ, जिससे इसे भविष्यमें कुछ सुख मिल सके
กุณฑธารกล่าวว่า “พราหมณ์ผู้นี้เป็นภักตะของเรา หากเหล่าเทวะพึงพอใจในเราแล้ว ข้าขอปรารถนาอนุเคราะห์แก่เขา เพื่อให้ภายหน้าได้มีความสุขบังเกิดขึ้นบ้าง”
कुण्डधार उवाच