कालनियमः शोकशमनं च
Kāla as Regulator; Pacification of Grief
तुष्टेन किज्चित् परमं सा सम्यक् प्रतितिष्ठति । विनीतक्रोधहर्षस्य सततं सिद्धिरुत्तमा,'संतोषसे बढ़कर कुछ नहीं है। जिसने क्रोध और हर्षको जीत लिया है, उसीके हृदयमें उस परम वैराग्यरूप संतोषकी सम्यक् प्रतिष्ठा होती है और उसे ही सदा उत्तम सिद्धि प्राप्त होती है
ไม่มีสิ่งใดประเสริฐยิ่งกว่าความสันโดษ ผู้ใดข่มชนะโทสะและความเริงใจได้ ในดวงใจของผู้นั้นความสันโดษอันเป็นไวรागยะสูงสุดย่อมตั้งมั่นโดยชอบ และผู้นั้นย่อมได้บรรลุสิทธิอันยอดเยี่ยมอยู่เนืองนิตย์
वैशम्पायन उवाच