Gṛhastha-vṛtti and Niyama: Models of Householder Livelihood and Discipline (गृहस्थवृत्ति-नियमाः)
सतां धर्मेण वर्तेत क्रियां शिष्टवदाचरेत् । असंरोधेन लोकस्य वृत्तिं लिप्सेदगर्हिताम्,श्रेष्ठ पुरुषोंके धर्मके अनुसार चले और शिष्टाचारका पालन करे तथा ऐसी आजीविका प्राप्त करनेकी इच्छा करे, जिससे दूसरे लोगोंकी जीविकाका हनन न हो और जिसकी लोकमें निन्दा न होती हो
เขาพึงดำเนินตามธรรมของสัตบุรุษ ประพฤติกิจด้วยมรรยาทของผู้เจริญ และพึงแสวงหาอาชีพอันไม่ควรถูกติเตียน—ที่ไม่ไปขัดขวางปากท้องของผู้อื่น และไม่เป็นที่ครหาในหมู่ชน
व्यास उवाच