प्रजापतयः देवगणाश्च दिशि-दिशि स्थिताः ऋषयः
Prajāpatis, Deva-Groups, and the Ṛṣis Assigned to the Directions
सर्पान् कुशाग्राणि तथोदपानं ज्ञात्वा मनुष्या: परिवर्जयन्ति | अज्ञानतस्तत्र पतन्ति केचि- ज्ज्ञाने फलं पश्य यथा विशिष्टम्,मनुष्य जब जान लेते हैं कि रास्तेमें सर्प है, कुशोंके काँटे हैं और कुएँ हैं, तब उनसे बचकर निकलते हैं। जो नहीं जानते हैं, ऐसे कितने ही पुरुष उन्हींपर गिर पड़ते हैं। अतः ज्ञानका जो विशिष्ट फल है, उसे तुम प्रत्यक्ष देख लो
sarpān kuśāgrāṇi tathodapānaṃ jñātvā manuṣyāḥ parivarjayanti | ajñānatastatra patanti kecij jñāne phalaṃ paśya yathā viśiṣṭam ||
ภีษมะกล่าวว่า—“เมื่อผู้คนรู้ว่าบนหนทางมีงู มีปลายหญ้ากุศะอันแหลมคม และมีบ่อ พวกเขาย่อมหลีกเลี่ยงและผ่านไปโดยสวัสดี. แต่ด้วยความไม่รู้ บางคนกลับตกลงสู่ภัยนั้นเอง. เพราะฉะนั้นจงดูเถิดว่า ผลแห่งความรู้นั้นยอดเยี่ยมและประจักษ์เพียงใด.”
भीष्म उवाच