Gautama–Yama Saṃvāda: Mātṛ-Pitṛ-Ṛṇa (Debt to Parents) and Śubha-Loka Attainment
त॑ कार्मुकधरं दृष्टवा श्रमार्त क्षुधितं तदा । समेत्य ऋषयस्तस्मिन् पूजां चक्कुर्यथाविधि,वे परिश्रमसे पीड़ित और भूखसे व्याकुल हो रहे थे। उस अवस्थामें धनुष धारण किये राजा सुमित्रको देखकर बहुत-से ऋषि उनके पास आये और सबने मिलकर उनका विधिपूर्वक स्वागत-सत्कार किया
ครั้งนั้น เมื่อเหล่าฤๅษีเห็นพระองค์ผู้ทรงคันศร อ่อนล้าด้วยความเหน็ดเหนื่อยและระทมด้วยความหิว จึงพากันเข้าไปเฝ้า แล้วร่วมกันประกอบการบูชาและต้อนรับตามแบบพิธีอันควร
भीष्म उवाच