Dvaipāyana-hrade Duryodhanasya Māyā — Yudhiṣṭhirasya Dharmoktiḥ (Śalya-parva, Adhyāya 30)
मायया सलिल स्तभ्य यत्रा भूत् ते स्थित: सुतः । अत्यद्भुतेन विधिना दैवयोगेन भारत,उसका जल शीतल और निर्मल था। वह देखनेमें मनोरम और दूसरे समुद्रके समान विशाल था। भारत! उसीके भीतर मायाद्वारा जलको स्तम्भित करके दैवयोग एवं अद्भुत विधिसे आपका पुत्र विश्राम कर रहा था
โอ ภารตะ! ณ ที่นั้น ด้วยฤทธิ์มายาทำให้น้ำหยุดนิ่ง และด้วยการประสานแห่งชะตากรรมกับกฎอันพิสดาร บุตรของท่านได้อยู่และพักสงบภายในน้ำนั้น
संजय उवाच