Śalya–Bhīma Gadā-saṃnipāta and Śalya’s Bāṇa-jāla against Yudhiṣṭhira
Book 9, Chapter 11
ऑपन--माजण बछ। अकाल एकादशोब< ध्याय: शल्यका पराक्रम, कौरव-पाण्डवयोद्धाओंके दन्ड्ययुद्ध तथा भीमसेनके द्वारा शल्यकी पराजय संजय उवाच तस्मिन् विलुलिते सैन्ये वध्यमाने परस्परम् । द्रवमाणेषु योधेषु विनदत्सु च दन्तिषु,संजय कहते हैं--महाराज! उस महासमरमें जब दोनों पक्षोंकी सेनाएँ परस्परकी मार खाकर भयसे व्याकुल हो उठीं, दोनों दलोंके योद्धा पलायन करने लगे, हाथी चिग्घाड़ने तथा पैदल सैनिक कराहने और चिल्लाने लगे; बहुत-से घोड़े मारे गये, सम्पूर्ण देहधारियोंका घोर भयंकर एवं विनाशकारी संहार होने लगा, नाना प्रकारके अस्त्र-शस्त्र परस्पर टकराने लगे, रथ और हाथी एक-दूसरेसे उलझ गये, युद्धकुशल योद्धाओंका हर्ष और कायरोंका भय बढ़ानेवाला संग्राम होने लगा, एक-दूसरेके वधकी इच्छासे उभयपक्षकी सेनाओंमें दोनों दलोंके योद्धा प्रवेश करने लगे, प्राणोंकी बाजी लगाकर महाभयंकर युद्धका जूआ आरम्भ हो गया तथा यमराजके राज्यकी वृद्धि करनेवाला घोर संग्राम चलने लगा, उस समय पाण्डव अपने तीखे बाणोंसे आपकी सेनाका संहार करने लगे। इसी प्रकार आपके योद्धा भी पाण्डव-सैनिकोंके वधर्में प्रवृत्त हो गये
sañjaya uvāca | tasmin vilulite sainye vadhyamāne parasparam | dravamāṇeṣu yodheṣu vinadatsu ca dantiṣu ||
สัญชัยกล่าวว่า—ข้าแต่พระมหาราชา เมื่อในมหาสมรภูมินั้นกองทัพปั่นป่วนและถูกฆ่าฟันกันเอง; เมื่อเหล่านักรบแตกหนี และช้างศึกคำรามกึกก้อง—ความหวาดผวาและความพินาศก็ปกคลุมทั่วสนามรบ อาวุธกระทบกัน รถวีรและช้างศึกพันพัวกันไปมา ในกาลนั้น พวกปาณฑพใช้ศรอันคมกริบทำลายกองทัพของพระองค์ และฝ่ายนักรบของพระองค์ก็เช่นกัน ต่างมุ่งสังหารทหารปาณฑพ
संजय उवाच