Aśvatthāmā’s Buddhi-Doctrine and Nocturnal Incursion Resolve (अश्वत्थाम्नः बुद्धिविचारः सौप्तिकसंकल्पश्च)
'साधुशिरोमणे! जैसे जलती हुई आग सूखे जंगल या तिनकोंकी राशिको जला डालती है, उसी प्रकार आज मैं एक साथ सोये हुए धृष्टद्युम्म आदि समस्त पांचालोंपर आक्रमण करके उन्हें मौतके घाट उतार दूँगा। उनका संहार कर लेनेपर ही मुझे शान्ति मिलेगी ।। पज्चालेषु भविष्यामि सूदयन्नद्य संयुगे । पिनाकपाणि: संक्रुद्धः स्वयं रुद्र: पशुष्विव,'जैसे प्रलयके समय क्रोधमें भरे हुए साक्षात् पिनाकधारी रुद्र समस्त पशुओं (प्राणियों)-पर आक्रमण करते हैं, उसी प्रकार आज युद्धमें मैं पांचालॉका विनाश करता हुआ उनके लिये कालरूप हो जाऊँगा
pañcāleṣu bhaviṣyāmi sūdayann adya saṁyuge | pinākapāṇiḥ saṁkruddhaḥ svayaṁ rudraḥ paśuṣv iva ||
สัญชัยกล่าวว่า— “วันนี้ในสนามรบ เราจะพุ่งเข้าหาชาวปัญจาละและสังหารให้สิ้น ดุจพระรุทระเองผู้ถือปิณากะ โหมด้วยพิโรธ ลงเข้าทำลายหมู่สัตว์ทั้งหลาย ฉันใด เราก็จักเป็นรูปแห่งกาล—ความตาย—แก่ชาวปัญจาละ ฉันนั้น เมื่อเราก่อความพินาศแก่พวกเขา”
संजय उवाच