(दाक्षिणात्य अधिक पाठके १५ श्लोक मिलाकर कुल ६७ श्लोक हैं) नफमशा< (0) आज अन+- एकाशीतितमो<ध्याय: धृतराष्ट्रकी चिन्ता और उनका संजयके साथ वार्तालाप वैशम्पायन उवाच वन॑ गतेषु पार्थेषु निर्जितिषु दुरोदरे । धृतराष्ट्र महाराज तदा चिन्ता समाविशत्,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! जब पाण्डव जूएमें हारकर वनमें चले गये, तब राजा धृतराष्ट्रको बड़ी चिन्ता हुई
Vaiśampāyana uvāca: vane gateṣu pārtheṣu nirjitiṣu dur-odare | dhṛtarāṣṭro mahārājas tadā cintā samāviśat ||
ไวศัมปายนะกล่าวว่า—เมื่อบุตรแห่งปฤถา คือเหล่าปาณฑพ พ่ายแพ้ในการพนันลูกเต๋าอันนำความพินาศ แล้วออกเดินทางสู่ป่า พระราชาธฤตราษฏระก็ถูกความกังวลลึกซึ้งเข้าครอบงำ
वैशम्पायन उवाच