कुन्त्युवाच कथं सद्धर्मचारित्रान् वृत्तस्थितिविभूषितान् | अक्षुद्रान् दृ्भक्तांश्व दैवतेज्यापरान् सदा,कुन्तीने कहा--पुत्रो! तुम उत्तम धर्मका पालन करनेवाले तथा सदाचारकी मर्यादासे विभूषित हो। तुममें क्षुद्रणाका अभाव है। तुम भगवानके सुदृढ़ भक्त और देवाराधनमें सदा तत्पर रहनेवाले हो, तो भी तुम्हारे ऊपर यह विपत्तिका पहाड़ टूट पड़ा है। विधाताका यह कैसा विपरीत विधान है। किसके अनिष्टचिन्तनसे तुम्हारे ऊपर यह महान् दुःख आया है, यह बुद्धिसे बार-बार विचार करनेपर भी मुझे कुछ सूझ नहीं पड़ता
kunty uvāca kathaṃ saddharmacāritrān vṛttasthitivibhūṣitān | akṣudrān dṛḍhabhaktāṃś ca daivatejyāparān sadā ||
กุนตีกล่าวว่า “ลูกเอ๋ย พวกเจ้าเป็นผู้ประพฤติธรรมอันแท้จริง งดงามด้วยระเบียบแห่งความประพฤติดีและความมั่นคงแห่งอุปนิสัย ปราศจากความต่ำทราม เป็นผู้มีภักติแน่วแน่ต่อองค์เทพ และมุ่งมั่นในการบูชาอยู่เสมอ—ไฉนภูเขาแห่งเคราะห์ร้ายนี้จึงยังถาโถมลงมาบนพวกเจ้า?”
वैशमग्पायन उवाच