Bhīṣma–Śiśupāla-saṃvādaḥ
Bhishma and Shishupala’s exchange in the assembly
युक्तमेतत् तृतीयायां प्रकृतौ वर्तता त्वया । दक्तुं धर्मादपेतार्थ त्वं हि सर्वकुरूत्तम:,तुम तीसरी प्रकृतिमें स्थित (नपुंसक) हो, अतः तुम्हारे लिये इस प्रकार धर्मविरुद्ध बातें कहना उचित ही है। फिर भी यह आश्चर्य है कि तुम समूचे कुरुकुलके श्रेष्ठ पुरुष कहे जाते हो
ท่านอยู่ใน ‘ธรรมชาติที่สาม’ (นปุงสกะ) จึงดูราวกับเหมาะสมแล้วที่ท่านจะกล่าวถ้อยคำอันผิดจากธรรมะ กระนั้นก็น่าประหลาด—กลับเรียกท่านว่าเป็นบุรุษผู้ประเสริฐที่สุดในหมู่กุรุทั้งปวง!
शिशुपाल उवाच