Adhyāya 107 — बहुयुद्धप्रकरणम्
Multiple Defensive Engagements to Protect Bhīṣma
ते वध्यमाना: पार्थेन कालेनेव युगक्षये । व्यद्रवन्त रणे राजन् भये जाते महारथा:,राजन! जैसे युगान्तमें साक्षात् कालके द्वारा सारी प्रजा मारी जाती है, उसी प्रकार रणक्षेत्रमें अर्जुनके द्वारा मारे जाते हुए सारे महारथी युद्धका मैदान छोड़कर भागने लगे
te vadhyamānāḥ pārthena kāleneva yugakṣaye | vyadravanta raṇe rājan bhaye jāte mahārathāḥ ||
ข้าแต่พระราชา ดุจเมื่อสิ้นยุคกาล เวลา (กาล) เองกวาดล้างสรรพชีวิตฉันใด เหล่ามหารถีทั้งหลายเมื่อถูกปารถะ (อรชุน) ฆ่าฟันในสนามรบ ก็เกิดความหวาดกลัว แตกกระบวนแล้วพากันหนีไปฉันนั้น
संजय उवाच