Marutta Seeks a Priest: Bṛhaspati’s Refusal and Nārada’s Guidance to Saṃvarta
Chapter 6
त॑ पृष्ठतो5नुगच्छेथा यत्र गच्छेत् स वीर्यवान् । तनेकान्ते समासाद्य प्राउजलि: शरणं व्रजे:,तुम उस पुरीके प्रवेश-द्वारपर पहुँचकर वहाँ कहींसे एक मुर्दा लाकर रख देना। पृथ्वीनाथ! जो उस मुर्देको देखकर सहसा पीछेकी ओर लौट पड़े, उसे ही संवर्त समझना और वे शक्तिशाली मुनि जहाँ कहीं जायँ उनके पीछे-पीछे चले जाना। जब वे किसी एकान्त स्थानमें पहुचें, तब हाथ जोड़कर शरणापत्र हो जाना
taṁ pṛṣṭhato ’nugacchethā yatra gacchet sa vīryavān | tam ekānte samāsādya prāñjaliḥ śaraṇaṁ vrajeḥ ||
นารทกล่าวว่า “ผู้ทรงเดชนั้นไปแห่งใด จงติดตามจากเบื้องหลังไปแห่งนั้น ครั้นได้เข้าไปถึงเขาในที่สงัดแล้ว จงประนมมือและขอพึ่งพิงเป็นที่พึ่ง”
नारद उवाच