Marutta Seeks a Priest: Bṛhaspati’s Refusal and Nārada’s Guidance to Saṃvarta
Chapter 6
कथं च तस्मै वर्तेयं कथं मां न परित्यजेत् । प्रत्याख्यातश्न तेनापि नाहं जीवितुमुत्सहे,मरुत्त बोले--वक्ताओंमें श्रेष्ठ नारदजी! आपने यह बात बताकर मुझे जिला दिया। अब यह बताइये कि मैं संवर्त मुनिका दर्शन कहाँ कर सकूँगा? मुझे उनके साथ कैसा बर्ताव करना चाहिये? मैं कैसा व्यवहार करूँ, जिससे वे मेरा परित्याग न करें। यदि उन्होंने भी मेरी प्रार्थना ठुकरा दी तब मैं जीवित नहीं रह सकूँगा
kathaṃ ca tasmai varteyaṃ kathaṃ māṃ na parityajet | pratyākhyātas tena api nāhaṃ jīvitum utsahe ||
ข้าควรประพฤติตนต่อท่านอย่างไร เพื่อไม่ให้ท่านทอดทิ้งข้า? หากแม้ท่านยังปฏิเสธ ข้าก็ไม่อาจดำรงชีวิตต่อไปได้
मरुत्त उवाच