धृतराष्ट्रस्य स्पर्शाभिलाषः — Dhṛtarāṣṭra’s Request for Touch and Permission for Tapas
भीष्मेण सर्वमुक्तोडसि कृष्णेन विदुरेण च । मयाप्यवश्यं वक्तव्यं प्रीत्या ते नृपसत्तम,नृपश्रेष्ठ) भीष्मजी, भगवान् श्रीकृष्ण तथा विदुरने तुम्हें सभी बातोंका उपदेश कर दिया है। मेरा भी तुम्हारे ऊपर प्रेम है, इसलिये मैंने भी तुम्हें कुछ बताना आवश्यक समझा है
โอ นฤปผู้ประเสริฐ ภีษมะ พระผู้เป็นเจ้า ศรีกฤษณะ และวิทุระได้กล่าวแก่ท่านครบถ้วนแล้ว ถึงกระนั้น ด้วยความรักใคร่ต่อท่าน ข้าพเจ้าก็เห็นว่าจำเป็นต้องกล่าวบางประการ
धृतराष्ट उवाच