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Shloka 10

Cyavana Explains His Tests; Kuśika Seeks Brāhmaṇya for His Line (च्यवन–कुशिक संवादः)

च्यवन: समनुप्राप्य कुशिकं वाक्यमब्रवीत्‌ | वस्तुमिच्छा समुत्पन्ना त्वया सह ममानघ,पूर्वकालमें भृगुपुत्र च्यवनको यह बात मालूम हुई कि हमारे वंशमें कुशिक-वंशकी कन्याके सम्बन्धसे क्षत्रियत्वका महान्‌ दोष आनेवाला है। यह जानकर उन परम बुद्धिमान्‌ मुनिश्रेष्ठने मन-ही-मन सारे गुण-दोष और बलाबलका विचार किया। तत्पश्चात्‌ कुशिकोंके समस्त कुलको भस्म कर डालनेकी इच्छासे तपोधन च्यवन राजा कुशिकके पास गये और इस प्रकार बोले--“निष्पाप नरेश! मेरे मनमें कुछ कालतक तुम्हारे साथ रहनेकी इच्छा हुई है!

จยวนะเข้าไปถึงกุศิกะแล้วกล่าวว่า—“ข้าแต่มหาราชผู้ปราศจากมลทิน ในใจข้าพเจ้าบังเกิดความปรารถนาจะพำนักอยู่กับพระองค์ชั่วระยะหนึ่ง”

भीष्म उवाच