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Shloka 9

पितामहो जगन्नाथ: सावित्री ब्रह्मण: सती । वेदभूरथ कर्ता च विष्णुर्नारायण: प्रभु:,(देवता और ऋषि आदिके वंशकी नामावली इस प्रकार है--) सर्वभूतनमस्कृत, देवासुरगुरु, अचिन्त्य, अनिर्देश्य सबके प्राणस्वरूप और अयोनिज (स्वयम्भू) जगदीश्वर पितामह भगवान्‌ ब्रह्माजी, उनकी पत्नी सती सावित्री देवी, वेदोंके उत्पत्तिस्थान जगत्कर्ता भगवान्‌ नारायण, तीन नेत्रोंवाले उमापति महादेव, देवसेनापति स्कन्द, विशाख, अग्नि, वायु, प्रकाश फैलानेवाले चन्द्रमा और सूर्य, शचीपति इन्द्र, यमराज, उनकी पत्नी धूमोर्णा, अपनी पत्नी गौरीके साथ वरुण, ऋद्धिसहित कुबेर, सौम्य स्वभाववाली देवी सुरभी गौ, महर्षि विश्रवा, संकल्प, सागर, गंगा आदि नदियाँ, मरुठ्रण, तपः:सिद्ध वालखिल्य ऋषि, श्रीकृष्णद्वैपायन व्यास, नारद, पर्वत, विश्वावसु, हाहा, हूहू, तुम्बुरु, चित्रसेन, विख्यात देवदूत, महासौभाग्यशालिनी देवकन्याएँ, दिव्य अप्सराओंके समुदाय, उर्वशी, मेनका, रम्भा, मिश्रकेशी, अल्म्बुषा, विश्वाची, घृताची, पंचचूडा और तिलोत्तमा आदि दिव्य अप्सराएँ, बारह आदित्य, आठ वसु, ग्यारह रुद्र, अश्विनीकुमार, पितर, धर्म, शास्त्रज्ञान, तपस्या, दीक्षा, व्यवसाय, पितामह, रात, दिन, मरीचिनन्दन कश्यप, शुक्र, बृहस्पति, मंगल, बुध, राहु, शनैश्वर, नक्षत्र, ऋतु, मास, पक्ष, संवत्सर, विनताके पुत्र गरुड़, समुद्र, कद्रूके पुत्र सर्पगण, शतद्गु, विपाशा, चन्द्रभागा, सरस्वती, सिन्धु, देविका, प्रभास, पुष्कर, गंगा, महानदी, वेणा, कावेरी, नर्मदा, कुलम्पुना, विशल्या, करतोया, अम्बुवाहिनी, सरयू, गण्डकी, लाल जलवाला महानद शोणभद्र, ताम्रा, अरुणा, वेत्रवती, पर्णाशा, गौतमी, गोदावरी, वेण्या, कृष्णवेणा, अद्रिजा, दृषद्वती, कावेरी, चक्षु, मन्दाकिनी, प्रयाग, प्रभास, पुण्यमय नैमिषारण्य, जहाँ विश्वेश्वरका स्थान है वह विमल सरोवर, स्वच्छ सलिलसे युक्त पुण्यतीर्थ कुरुक्षेत्र, उत्तम समुद्र, तपस्या, दान, जम्बूमार्ग, हिरण्वती, वितस्ता, प्लक्षवती नदी, वेदस्मृति वेदवती, मालवा, अश्ववती, पवित्र भूभाग, गंगाद्वार (हरिद्वार), ऋषिकुल्या, समुद्रगामिनी पवित्र नदियाँ, पुण्यसलिला चर्मण्वती नदी, कौशिकी, यमुना, भीमरथी, महानदी बाहुदा, माहेन्द्रवाणी, त्रिदिवा, नीलिका, सरस्वती, नन्‍्दा, अपरनन्दा, तीर्थभूत महान्‌ हृद, गया, फल्गुतीर्थ, देवताओंसे युक्त धर्मारण्य, पवित्र देवनदी, तीनों लोकोंमें विख्यात, पवित्र एवं सर्वपापनाशक कल्याणमय ब्रह्मनिर्मित सरोवर (पुष्करतीर्थ)) दिव्य ओषधियोंसे युक्त हिमवान्‌ पर्वत, नाना प्रकारके धातुओं, तीर्थों, औषधोंसे सुशोभित विन्ध्यगिरि, मेरु, महेन्द्र, मलय, चाँदीकी खानोंसे युक्त श्वेतगिरि, शृंगवान्‌, मन्दर, नील, निषध, दर्दुर, चित्रकूट, अजनाभ, गन्धमादन पर्वत, पवित्र सोमगिरि तथा अन्यान्य पर्वत, दिशा, विदिशा, भूमि, सभी वृक्ष, विश्वेदेव, आकाश, नक्षत्र और ग्रहगण--ये सदा हमारी रक्षा करें तथा जिनके नाम लिये गये हैं और जिनके नहीं लिये गये हैं, वे सम्पूर्ण देवता हमलोगोंकी रक्षा करते रहें

bhīṣma uvāca |

pitāmaho jagannāthaḥ sāvitrī brahmaṇaḥ satī |

vedabhūr atha kartā ca viṣṇur nārāyaṇaḥ prabhuḥ ||

ปิตามหะ ผู้เป็นเจ้าแห่งโลกคือพรหม พร้อมด้วยสตรีผู้บริสุทธิ์สาวิตรีชายาของพรหม และพระนารายณ์ (วิษณุ) ผู้เป็นบ่อเกิดแห่งพระเวทและเป็นผู้สร้างสรรพโลก

पितामहःGrandfather; Brahmā (as progenitor)
पितामहः:
Karta
TypeNoun
Rootपितामह
FormMasculine, Nominative, Singular
जगन्नाथःLord of the world
जगन्नाथः:
Karta
TypeNoun
Rootजगन्नाथ
FormMasculine, Nominative, Singular
सावित्रीSāvitrī (goddess)
सावित्री:
Karta
TypeNoun
Rootसावित्री
FormFeminine, Nominative, Singular
ब्रह्मणःof Brahmā
ब्रह्मणः:
Adhikarana
TypeNoun
Rootब्रह्मन्
FormMasculine, Genitive, Singular
सतीthe virtuous one; chaste lady
सती:
Karta
TypeNoun
Rootसती
FormFeminine, Nominative, Singular
वेदभूःsource/origin of the Vedas
वेदभूः:
Karta
TypeNoun
Rootवेदभू
FormMasculine, Nominative, Singular
अथand then; also
अथ:
TypeIndeclinable
Rootअथ
कर्ताcreator; doer
कर्ता:
Karta
TypeNoun
Rootकर्तृ
FormMasculine, Nominative, Singular
and
:
TypeIndeclinable
Root
विष्णुःViṣṇu
विष्णुः:
Karta
TypeNoun
Rootविष्णु
FormMasculine, Nominative, Singular
नारायणःNārāyaṇa
नारायणः:
Karta
TypeNoun
Rootनारायण
FormMasculine, Nominative, Singular
प्रभुःlord; master
प्रभुः:
Karta
TypeNoun
Rootप्रभु
FormMasculine, Nominative, Singular

भीष्म उवाच

B
Bhīṣma
B
Brahmā (Pitāmaha, Jagannātha)
S
Sāvitrī
V
Viṣṇu
N
Nārāyaṇa
V
Vedas

Educational Q&A

Recollection of the highest divine principles—Brahmā as cosmic progenitor, Sāvitrī as chaste Vedic inspiration, and Nārāyaṇa as the lordly source of sacred order—functions as a dharmic act. The verse models how reverence and right remembrance are used to seek protection and to orient the mind toward cosmic law (ṛta/dharma).

Bhīṣma begins a formal enumeration/invocation. This verse names the first figures—Brahmā with Sāvitrī and Nārāyaṇa/Viṣṇu—before the text proceeds to list further deities, sages, rivers, mountains, and sacred places as part of a comprehensive protective recitation.