Adhyāya 138: Vāyu’s Exempla on Brāhmaṇa-Prabhāva and a Cosmological Clarification
इस प्रकार श्रीमह्याभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें दिग्गजोंका धर्मसम्बन रहस्यविषयक एक सौ बत्तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥/ १३२ ॥। न२9्च्स्स्ज्स्ि्स्सि ह्य ४-3 त्रयस्त्रिंशर्दाधिकशततमो< ध्याय: महादेवजीका धर्मसम्बन्धी रहस्य महेश्वर उवाच सारमुद्धृत्य युष्माभि: साधुधर्म उदाह्नत: । धर्मगुहामिदं मत्त: शुणुध्व॑ सर्व एव ह,(ऋषि, मुनि, देवता और पितरोंसे) महेश्वर बोले--तुमलोगोंने धर्मशास्त्रका सार निकालकर उत्तम धर्मका वर्णन किया है। अब सब लोग मुझसे धर्म-सम्बन्धी इस गूढ़ रहस्यका वर्णन सुनो
maheśvara uvāca | sāram uddhṛtya yuṣmābhiḥ sādhudharma udāhṛtaḥ | dharmaguhām idaṃ mattaḥ śṛṇudhva sarva eva ha ||
พระมหีศวรตรัสว่า “พวกท่านได้สกัดเอาสาระแล้วประกาศหนทางธรรมอันประเสริฐไว้แล้ว บัดนี้ท่านทั้งปวงจงฟังจากเราเถิด ถึงความลับอันลึกซึ้งเร้นอยู่ภายในแห่งธรรมะนี้”
महेश्वर उवाच