Ruru–Pramadvarā: Lineage, Fosterage, Betrothal, and the Snakebite Crisis (Ādi Parva, Adhyāya 8)
स्थूलकेश: स तेजस्वी विजने बन्धुवर्जिताम् । सतां दृष्टवा तदा कन्यां स्थूलकेशो महाद्विज:,तदनन्तर तेजस्वी महर्षि स्थूलकेशने एकान्त स्थानमें त्यागी हुई उस बन्धुहीन कन्याको देखा, जो देवताओंकी बालिकाके समान दिव्य शोभासे प्रकाशित हो रही थी। उस समय उस कन्याको वैसी दशामें देखकर द्विजश्रेष्ठ मुनिवर स्थूलकेशके मनमें बड़ी दया आयी; अतः वे उसे उठा लाये और उसका पालन-पोषण करने लगे। वह सुन्दरी कन्या उनके शुभ आश्रमपर दिनोदिन बढ़ने लगी
śaunaka uvāca |
sthūlakeśaḥ sa tejasvī vijane bandhuvarjitām |
satāṃ dṛṣṭvā tadā kanyāṃ sthūlakeśo mahādvijaḥ |
ฤๅษีสถูลเกศผู้รุ่งเรือง พราหมณ์ผู้ยิ่งใหญ่ ได้เห็นเด็กหญิงผู้ไร้ญาติและถูกทอดทิ้งอยู่ในที่เปลี่ยว
शौनक उवाच