Sundopasundayor Digvijayaḥ — The Conquests of Sunda and Upasunda
Nārada’s Account
ते सर्वेडवस्थिता धर्मे सर्वे चैवैकचेतस: । अधर्मेण निरस्ताश्च तुल्ये राज्ये विशेषत:,वे सब धर्ममें स्थित हैं; उन सबका एक चित्त--एक विचार है। इस राज्यपर तुम्हारा और उनका समान स्वत्व है, तो भी उनके साथ विशेष अधर्मपूर्ण बर्ताव करके उन्हें यहाँसे हटाया गया है
พวกเขาทั้งหมดตั้งมั่นอยู่ในธรรม และมีใจเป็นอันหนึ่งอันเดียวกัน ทั้งที่ในราชอาณาจักรนี้ท่านกับพวกเขามีสิทธิ์เสมอกัน แต่กลับถูกผลักไสออกไปด้วยอธรรมอันร้ายแรงเป็นพิเศษ
भीष्म उवाच