Ādi-parva, Adhyāya 187: Drupada’s Inquiry and the Dharma Debate on Draupadī’s Marriage
अर्जुनो धनुषो<भ्याशे तस्थौ गिरिरिवाचल: । स तद् धनुः परिक्रष्य प्रदक्षिणमथाकरोत्,इस प्रकार जब ब्राह्मणलोग भाँति-भाँतिकी बातें कर रहे थे, उसी समय अर्जुन धनुषके पास जाकर पर्वतके समान अविचलभावसे खड़े हो गये। फिर उन्होंने धनुषके चारों ओर घूमकर उसकी परिक्रमा की
อรชุนยืนอยู่ใกล้คันศรดุจภูผาอันไม่หวั่นไหว แล้วจึงจับคันศรนั้นไว้ และทำประทักษิณาเวียนรอบเป็นการคารวะ
वैशम्पायन उवाच