आदि पर्व — द्रौपदी-स्वयंवरानन्तरवृत्तम्
Aftermath of Draupadī’s Svayaṃvara
रुक्माज्देन वीरेण तथा रुक्मरथेन च । कौरव्य: सोमदत्तश्न पुत्राश्नास्य महारथा:,इनके सिवा और भी असंख्य महामना क्षत्रियशिरोमणि भूमिपाल यहाँ आये हैं। उधर देखो, गान्धारराज सुबलके पुत्र शकुनि, वृषक और बृहद्वल बैठे हैं। गान्धारराजके ये सभी पुत्र यहाँ पधारे हैं। अश्वत्थामा और भोज--ये दोनों महान् तेजस्वी और सम्पूर्ण शस्त्रधारियोंमें श्रेष्ठ हैं और तुम्हारे लिये गहने-कपड़ोंसे सज-धजकर यहाँ आये हैं। राजा बृहन्त, मणिमान्, दण्डधार, सहदेव, जयत्सेन, राजा मेघसंधि, अपने दोनों पुत्रों शंख और उत्तरके साथ राजा विराट, वृद्धक्षेमके पुत्र सुशर्मा, राजा सेनाबिन्दु, सुकेतु और उनके पुत्र सुवर्चा, सुचित्र, सुकुमार, वृक, सत्यधृति, सूर्यध्वज, रोचमान, नील, चित्रायुध, अंशुमान्, चेकितान, महाबली श्रेणिमान्ू, समुद्रसेनके प्रतापी पुत्र चन्द्रसेन, जलसंध, विदण्ड और उनके पुत्र दण्ड, पौण्ड्रक वासुदेव, पराक्रमी भगदत्त, कलिंगनरेश ताम्रलिप्तनरेश, पाटनके राजा, अपने दो पुत्रों वीर रुक््मांगद तथा रुक्मरथके साथ महारथी मद्रराज शल्य, कुरुवंशी सोमदत्त तथा उनके तीन महारथी शूरवीर पुत्र भूरि, भूरिश्रवा और शल, काम्बोजदेशीय सुदक्षिण, पूरुवंशी दृढ़धन्वा
dhṛṣṭadyumna uvāca |
rukmāṅgadēna vīreṇa tathā rukmarathena ca |
kauravyaḥ somadattasya putrāś cāsya mahārathāḥ ||
ธฤษฏทยุมน์กล่าวว่า—“พร้อมด้วยรุกมางคทะผู้กล้า และรุกมรถะด้วย ทั้งบุตรทั้งหลายของโสมทัตตะแห่งวงศ์กุรุ—ล้วนเป็นมหารถีทั้งสิ้น.”
धृष्टह्युम्न उवाच
The verse contributes to the epic’s ethical atmosphere by stressing how many eminent Kṣatriya leaders are drawn into the coming war; the implicit lesson is that conflict among kin and allies magnifies responsibility and the consequences of adharma, making restraint, right counsel, and adherence to duty crucial.
Dhṛṣṭadyumna is identifying notable warriors present in the assembly, naming Rukmāṅgada, Rukmaratha, and Somadatta’s sons as mahārathas; it functions as part of a broader enumeration of forces and allies, highlighting the scale and seriousness of the confrontation.