धृष्टद्युम्नेन समागतक्षत्रियगणगणना
Dhṛṣṭadyumna’s Enumeration of Assembled Kṣatriyas
सच तां पूरयामास लक्ष्म्या लक्ष्मीवतां वर: । अयोध्यां व्योम शीतांशु: शरत्काल इवोदित:,जैसे शीतल किरणोंवाले चन्द्रमा शरत्कालमें उदित हो आकाशको अपनी ज्योत्स्नासे जगमग कर देते हैं, उसी प्रकार लक्ष्मीवानोंमें श्रेष्ठ नरेशने उस अयोध्यापुरीको शोभासे परिपूर्ण कर दिया
และพระราชาผู้เลิศในหมู่ผู้ทรงศรีได้ทำให้อโยธยาเปี่ยมด้วยความรุ่งเรือง ดุจพระจันทร์ผู้มีรัศมีเย็นซึ่งอุบัติในฤดูสารท ทำให้ท้องฟ้าสว่างไสวด้วยแสงจันทร์
गन्धर्व उवाच