Kuntī–Brāhmaṇa Saṃvāda on Atithi-dharma and Crisis Strategy (Ādi Parva 149)
विदुरो मूर्ध्न्युपाप्राय परिष्वज्य वचो मुहुः । अरिएटं गच्छताव्यग्रा: पन्थानमिति चाब्रवीत्,“विदुरजीने आप सभी पाण्डुपुत्रोंको भावनाद्वारा हृदयसे लगाकर और मस्तक सूँघकर यह आशीर्वाद फिर कहलाया है कि “तुम शान्तचित्त हो कुशलपूर्वक मार्गपर बढ़ते जाओ”
วิทุระได้ดมศีรษะและโอบกอดอยู่เนือง ๆ แล้วกล่าวว่า “พวกเจ้าจงไปตามทางเถิด อย่าได้ว้าวุ่น; ขอให้ปลอดภัยและราบรื่น”
वैशम्पायन उवाच