Adhyāya 129 — Public Acclaim of the Pāṇḍavas and Duryodhana’s Appeal to Dhṛtarāṣṭra
ओषधीभिरवविषध्नीभि: सुरभीभिर्विशेषत: । भुक्तवान् परमान्नं च नागैर्दत्त महाबल:,तब महाबाहु भीमसेन स्नान करके शुद्ध हो गये। उन्होंने श्वेत वस्त्र और श्वेत पुष्पोंकी माला धारण की। तत्पश्चात् नागराजके भवनमें उनके लिये कौतुक एवं मंगलाचार सम्पन्न किये गये। फिर उन महाबली भीमने विष-नाशक सुगन्धित ओषधियोंके साथ नागोंकी दी हुई खीर खायी
oṣadhībhir avaviṣadhnībhiḥ surabhībhir viśeṣataḥ | bhuktavān paramānnaṃ ca nāgair dattaṃ mahābalaḥ ||
ภีมผู้ทรงพละได้เสวยอาหารอันประณีตยิ่งที่นาคถวาย พร้อมสมุนไพรหอมเป็นพิเศษซึ่งมีฤทธิ์ถอนพิษ
वैशम्पायन उवाच