Droṇa’s Ācārya-Dakṣiṇā: Capture of Drupada and Division of Pāñcāla (द्रोण-आचार्यदक्षिणा)
ततः प्रबुद्ध: कौन्तेय: सर्व संछिद्य बन्धनम् | पोथयामास तान् सर्वान् केचिद् भीताः: प्रदुद्रुवु:,तत्पश्चात् कुन्तीनन्दन भीम जाग उठे। उन्होंने अपने सारे बन्धनोंको तोड़कर उन सभी सर्पोंको पकड़-पकड़कर धरतीपर दे मारा। कितने ही सर्प भयके मारे भाग खड़े हुए
แล้วกุนตีบุตรก็ตื่นขึ้น เขาฉีกทำลายพันธนาการทั้งหมด แล้วจับงูเหล่านั้นทีละตัวฟาดกระแทกลงกับพื้น หลายตัวแตกตื่นด้วยความกลัวและหนีไป
वैशम्पायन उवाच