Ādi Parva, Adhyāya 103 — Dhṛtarāṣṭra–Gāndhārī Vivāha: Proposal, Consent, and the Vow
तद्वाक्याकुलित: क्रोधाद् विधूमो5ग्निरिव ज्वलन् । विततेषुधनुष्याणिविकुज्चितललाटभृत्,फिर भीष्मजीने भी अपना पराक्रम प्रकट करते हुए प्रत्येक योद्धाको दो-दो बाणोंसे बींध डाला। बाणों और शक्तियोंसे व्याप्त उनका वह तुमुल युद्ध देवासुर-संग्रामके समान भयंकर जान पड़ता था। उस समरांगणमें भीष्मने लोकविख्यात वीरोंके देखते-देखते उनके धनुष, ध्वजाके अग्रभाग, कवच और मस्तक सैकड़ों और हजारोंकी संख्यामें काट गिराये। युद्धमें रथसे विचरनेवाले भीष्मजीकी दूसरे वीरोंसे बढ़कर हाथकी फुर्ती और आत्मरक्षा आदिकी शत्रुओंने भी सराहना की। सम्पूर्ण शस्त्रधारियोंमें श्रेष्ठ भरतकुलभूषण भीष्मजीने उन सब योद्धाओंको जीतकर कन्याओंको साथ ले भरतवंशियोंकी राजधानी हस्तिनापुरको प्रस्थान किया। राजन्! तब महारथी शाल्वराजने पीछेसे आकर युद्धके लिये शान्तनुनन्दन भीष्मपर आक्रमण किया। शाल्वके शारीरिक बलकी कोई सीमा नहीं थी। जैसे हथिनीके पीछे लगे हुए एक गजराजके पृष्ठभागमें उसीका पीछा करनेवाला दूसरा यूथपति दाँतोंसे प्रहार करके उसे विदीर्ण करना चाहता है, उसी प्रकार बलवानोंमें श्रेष्ठ महाबाहु शाल्वराज सत्रीको पानेकी इच्छासे ईर्ष्या और क्रोधके वशीभूत हो भीष्मका पीछा करते हुए उनसे बोला--“अरे ओ! खड़ा रह, खड़ा रह।” तब शत्रुसेनाका संहार करनेवाले पुरुषसिंह भीष्म उसके वचनोंको सुनकर क्रोधसे व्याकुल हो धूमरहित अग्निके समान जलने लगे और हाथमें धनुष-बाण लेकर खड़े हो गये। उनके ललाटमें सिकुड़न आ गयी
tadvākyākulitaḥ krodhād vidhūmo 'gnir iva jvalan | vitateṣudhanur-yāṇi vikuñcita-lalāṭa-bhṛt ||
ไวศัมปายนะกล่าวว่า—เมื่อถ้อยคำนั้นกระทบใจ ภีษมะก็เดือดดาลลุกโพลงดุจไฟไร้ควัน เขายืนมั่นคงพร้อมคันศรและลูกศรในมือ หน้าผากขมวดเป็นรอยบึ้งอันน่าเกรงขาม—ประหนึ่งความอดกลั้นของนักรบได้แปรเป็นพิโรธอันชอบธรรมต่อคำท้าทาย
वैशम्पायन उवाच
The verse highlights the kṣatriya ideal of measured restraint that can turn into decisive, duty-bound fury when honor is challenged. Bhīṣma’s ‘smokeless fire’ imagery suggests focused, controlled intensity rather than chaotic rage.
After hearing the challenger’s words, Bhīṣma becomes visibly enraged, readies his bow and arrows, and stands prepared to respond in battle, his furrowed brow marking the shift from pursuit to confrontation.