अनुक्रमणिकाध्यायः (Anukramaṇikā Adhyāya) — Invocation, Narrator Frame, and Textual Scope
पुष्पवृष्टि: शुभा गन्धा: शड्खदुन्दुभिनि:स्वना: । आसन प्रवेशे पार्थानां तदद्भुतमिवाभवत्,जिस समय पाण्डवोंने नगरमें प्रवेश किया, उसी समय फूलोंकी वर्षा होने लगी, सब ओर सुगन्ध छा गयी तथा शंख और दुन्दुभियोंके मांगलिक शब्द सुनायी देने लगे। यह एक अद्भुत चमत्कारकी-सी बात हुई
ครั้นเหล่าปารถะย่างเข้าสู่นคร ก็มีฝนดอกไม้โปรยปราย กลิ่นหอมมงคลแผ่ไปทั่ว และเสียงสังข์กับกลองทุนนุภีบรรเลงเป็นนิมิตมงคล—ทั้งหมดนั้นประหนึ่งอัศจรรย์ยิ่งนัก