Adharma’s Short-Lived Prosperity and the Restorative Path of Tīrtha (लोमश–युधिष्ठिर संवादः)
कुन्तीकुमार पाण्डुनन्दन! जैसे राजा भगीरथ हो गये हैं, जैसे गय आदि राजर्षि हो चुके हैं तथा जैसे महाराज ययाति हुए हैं, वैसे ही तुम भी विख्यात हो ।। युधिछिर उवाच न हर्षात् सम्प्रपश्यामि वाक्यस्यास्योत्तरं क्वचित् | स्मरेद्धि देवराजो यं को नामाभ्यधिकस्तत:
Yudhiṣṭhira uvāca: na harṣāt samprapaśyāmi vākyasyāsyottaraṃ kvacit | smareddhi devarājo yaṃ ko nāmābhyadhikastataḥ ||
యుధిష్ఠిరుడు అన్నాడు—ఆనందంతో మునిగిపోయి ఈ మాటలకు తగిన ప్రత్యుత్తరం నాకు ఎక్కడా కనిపించడం లేదు. దేవరాజు ఇంద్రుడు ఎవణ్ని స్మరిస్తాడో, అతనికంటే గొప్పవాడు మరెవరు ఉండగలరు?
युधिछिर उवाच