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Shloka 3

Dhṛtarāṣṭra’s Anxiety and Sañjaya’s Report on the Pandavas’ Coalition

Kāmyaka Context

धृतराष्ट्र रवाच श्रुतं मे सूत कार्त्स्न्येन कर्म पार्थस्य धीमतः । कच्चित्‌ तवापि विदितं याथातथ्येन सारथे,धृतराष्ट्र बोले--सूत! मैंने परम बुद्धिमान्‌ कुन्तीकुमार अर्जुनका सारा वृत्तान्त सुना है। सारथे! क्या तुम्हें भी इस विषयमें यथार्थ बातें ज्ञात हुई हैं?

ధృతరాష్ట్రుడు పలికెను—హే సూతా! పరమ బుద్ధిమంతుడైన పార్థ అర్జునుని కార్యవృత్తాంతమంతా నేను పూర్తిగా విన్నాను. హే సారథీ! నీకూ ఈ విషయమై యథాతథ్యంగా తెలిసి ఉందా?

वैशम्पायन उवाच