Vyāsa’s Counsel to Yudhiṣṭhira: Pratismṛti-vidyā, Arjuna’s Aśtra-Quest, and the Move to Kāmyaka
तत् ते<स्तु सर्व कौन्तेय यथा च स्वयमिच्छसि । द्रौोपदीने कहा--कुन्तीकुमार महाबाहु धनंजय! आपके जन्म लेनेके समय आर्या कुन्तीने अपने मनमें आपके लिये जो-जो इच्छाएँ की थीं तथा आप स्वयं भी अपने हृदयमें जो-जो मनोरथ रखते हों, वे सब आपको प्राप्त हों
tat te 'stu sarva kaunteya yathā ca svayam icchasi |
హే కౌంతేయా! నీవు స్వయంగా ఏదేమి కోరుకుంటావో, అవన్నీ నీకు లభించుగాక.
वैशम्पायन उवाच