अम्बोपाख्याने तापसानां विचारः तथा होत्रवाहनस्य उपदेशः
Ambā among ascetics; Hotravāhana directs her to Paraśurāma
एवं तां भाषमाणां तु कन््यां शाल्वपतिस्तदा । परितत्याज कौरव्य करुणं परिदेवतीम्,कुरुनन्दन! राजकन्या अम्बा करुणस्वरसे विलाप करती हुई इसी प्रकार कितनी ही बातें कहती रही; परंतु शाल्वराजने उसे सर्वथा त्याग दिया
evaṃ tāṃ bhāṣamāṇāṃ tu kanyāṃ śālvapatiḥ tadā | paritatyāja kauravya karuṇaṃ paridevatīm ||
కౌరవ్యా! ఆ కన్య కరుణ స్వరంతో విలపిస్తూ ఇలానే ఎన్నో మాటలు చెప్పినా, ఆ సమయంలో శాల్వాధిపతి ఆమెను పూర్తిగా తిరస్కరించాడు.
भीष्म उवाच