Adhyāya 284: Tapas as a Corrective to Household Attachment
Parāśara’s Instruction
पवित्र च पवित्राणां मड़लानां च मड्जलम् | गिरिको हिंडुको वृक्षो जीव: पुद्गल एव च,आप पवित्रोंके भी पवित्र और मंगलोंके भी मंगल हैं। आप ही गिरिक (अचेतनको भी चेतन करनेवाले), हिंडुक (गमनागमन करनेवाले), संसार-वृक्ष, जीव, शरीर, प्राण, सत्त्व, रज, तम, अप्रमद (स्त्रीरहित--ऊर्ध्वरेता), प्राण, अपान, समान, उदान, व्यान, उन्मेष, निमेष (आँखोंका खोलना-मींचना), छींकना और जँभाई लेना आदि चेष्टाएँ भी आप ही हैं। आपकी अग्निमयी लाल रंगकी दृष्टि भीतर छिपी हुई है। आपके मुख और उदर महान् हैं
pavitraṁ ca pavitrāṇāṁ maṅgalānāṁ ca maṅgalam | giriko hiṇḍuko vṛkṣo jīvaḥ pudgala eva ca ||
భీష్ముడు పలికెను—నీవు పవిత్రములలోనూ పరమ పవిత్రుడవు, మంగళములలోనూ పరమ మంగళమవు. నీవే ‘గిరిక’—జడములోనూ చైతన్యాన్ని జాగృతం చేసేవాడు; నీవే ‘హిణ్డుక’—గమనాగమనములు చేసేవాడు; నీవే సంసారవృక్షము, జీవుడు, దేహధారి పురుషుడును.
भीष्म उवाच