तुलाधार-उपदेशः
Tulādhāra’s Instruction to Jājali on Ahiṃsā and Abhaya-dāna
भीष्म उवाच आहुः षष्टिं बुद्धिगुणान् वै भूतविशिष्टा नित्यविषक्ता: । भूतविभूती श्चाक्षरसृष्टा: पुत्र न नित्यं तदिह वदन्ति,भीष्मजीने कहा--वत्स युधिष्ठिर! महर्षियोंका कहना है कि बुद्धिके साठ गुण हैं; अर्थात् पाँचों भूतोंके पूर्वाक्त पचास गुण तथा बुद्धिके पाँच गुण मिलकर पचपन हुए। इनमें पञ्चभूतोंको भी बुद्धिके गुणरूपसे गिन लेनेपर वे साठ हो जाते हैं। ये सभी गुण नित्य चैतन्यसे मिले हुए हैं। पणचमहाभूत और उनकी विभूतियाँ अविनाशी परमात्माकी सृष्टि हैं; परंतु परिवर्तनशील होनेके कारण उसे तत्त्वज्ञ पुरुष नित्य नहीं बताते हैं
bhīṣma uvāca | āhuḥ ṣaṣṭiṁ buddhiguṇān vai bhūtaviśiṣṭā nityaviṣaktāḥ | bhūtavibhūtīś cākṣarasṛṣṭāḥ putra na nityaṁ tad iha vadanti |
భీష్ముడు పలికెను—వత్సా! బుద్ధికి అరవై గుణములు ఉన్నాయని ఋషులు చెబుతారు; అవి భూతభేదములతో విశిష్టమై నిత్య చైతన్యముతో సంయుక్తమై ఉంటాయి. పంచమహాభూతములు మరియు వాటి విభూతులు అక్షరుడైన (అవినాశి) పరమాత్మ సృష్టి; కాని మార్పులకు లోనగుటవలన తత్త్వజ్ఞులు ఈ లోకములో వాటిని ‘నిత్యము’ అని చెప్పరు.
भीष्म उवाच