Jarāsandha-vadha-upadeśa and the Departure toward Magadha (जरासन्धवधोपदेशः मागधप्रस्थानं च)
संश्लेषिते मया दैवात् कुमार: समपद्यत । तव भाग्यान्महाराज हेतुमात्रमहं त्विह,अतः मैं उस पूजनके बदले तुम्हारा कोई उपकार करनेकी बात सदा सोचती रहती थी। धर्मात्मन! मैंने तुम्हारे पुत्रके शरीरके इन दोनों टुकड़ोंको देखा और दोनोंको जोड़ दिया। महाराज! दैववश तुम्हारे भाग्यसे ही उन टुकड़ोंके जुड़नेसे यह राजकुमार प्रकट हो गया है। मैं तो इसमें केवल निमित्तमात्र बन गयी हूँ
saṃśleṣite mayā daivāt kumāraḥ samapadyata | tava bhāgyān mahārāja hetumātram ahaṃ tv iha ||
నేను వాటిని కలిపినప్పుడు దైవయోగంతో ఈ కుమారుడు ప్రकटించాడు. మహారాజా! ఇది మీ భాగ్యవశాత్తే జరిగింది; నేను ఇక్కడ కేవలం నిమిత్తమాత్రమే.
श्रीकृष्ण उवाच