द्रोण–धृष्टद्युम्नयुद्धवर्णनम्
Drona–Dhrishtadyumna Battle Description
रामस्य जामदग्न्यस्य प्रतिजग्राह कश्यप: । उस यज्ञमें विधिपूर्वक बत्तीस हाथ ऊँची सोनेकी वेदी बनायी गयी थी, जो सब प्रकारके सैकड़ों रत्नोंसे परिपूर्ण और सौ पताकाओंसे सुशोभित थी। जमदग्निनन्दन परशुरामकी उस वेदीको तथा ग्रामीण और जंगली पशुओंसे भरी-पूरी इस पृथ्वीको भी महर्षि कश्यपने दक्षिणारूपसे ग्रहण किया || १६-१७ $ ।। ततः शतसहस्राणि द्विपेन्द्रान हेमभूषणान्,उस समय परशुरामजीने लाखों गजराजोंको सोनेके आभूषणोंसे विभूषित करके तथा पृथ्वीको चोर-डाकुओंसे सूनी और साधु पुरुषोंसे भरी-पूरी करके महायज्ञ अश्वमेधमें कश्यपजीको दे दिया
rāmasya jāmadagnyasya pratijagrāha kaśyapaḥ |
నారదుడు పలికెను—జమదగ్నినందనుడు రాముడు (పరశురాముడు) ప్రతిజ్ఞ చేసిన దానాన్ని మహర్షి కశ్యపుడు స్వీకరించాడు.
नारद उवाच