अभिमन्यु-परिवेष्टनम्
Encirclement and Counterassault of Abhimanyu
सकेयूराज्गदान् बाहून् हृद्यगगन्धानुलेपनान् संचिच्छेदार्जुनिस्तूर्ण त्॒वदीयानां सहस्रश:,महाराज! अर्जुनकुमार अभिमन्युने आपके सहस्रों सैनिकोंकी उन भुजाओंको तुरंत काट डाला, जिनमें मनोहर सुगन्धयुक्त चन्दनका लेप लगा हुआ था। वीरोंकी उन भुजाओंमें गोहके चमड़ेसे बने हुए दस्ताने बँधे हुए थे। धनुष और बाण शोभा पाते थे। किन्हीं भुजाओंमें ढाल, तलवार, अंकुश और बागडोर दिखायी देती थीं। किन्हींमें तोमर और फरसे शोभा पाते थे। किन्हींमें गदा, लोहेकी गोलियाँ, प्रास, ऋष्टि, तोमर, पट्टिश, भिन्दिपाल, परिघ, श्रेष्ठ शक्ति, कम्पन, प्रतोद, महाशंख और कुन्त दृष्टिगोचर हो रहे थे। किन्हीं-किन्हीं भुजाओंने शत्रुओंकी चोटियाँ पकड़ रखी थीं। किन्हींमें मुदूगर फेंकनेयोग्य अन्यान्य अस्त्र, पाश, परिघ तथा प्रस्तरखण्ड दिखायी देते थे। वीरोंकी वे सभी भुजाएँ केयूर और अंगद आदि आभूषणोंसे विभूषित थीं
sakeyūrān gadān bāhūn hṛdyagandhānulepanān saṃciccheda arjunis tūrṇaṃ tvadīyānāṃ sahasraśaḥ, mahārāja
సంజయుడు పలికెను: మహారాజా! అర్జునపుత్రుడు అభిమన్యుడు మీ సహస్రసైనికుల భుజాలను క్షణంలోనే నరికివేశాడు—కేయూరాలతో అలంకరించబడి, హృద్యమైన సుగంధ లేపనంతో ముద్దాడిన భుజాలను।
संजय उवाच