द्रोणनिन्दाश्रवणं तथा सात्यकि–पार्षतविवादः
Hearing the reproach of Droṇa and the Sātyaki–Pārṣata dispute
/ अपर बक। है २ >> सप्तषष्ट्याधिेकशततमो< ध्याय: कर्णके द्वारा सहदेवकी पराजय, शल्यके द्वारा विराटके भाई शतानीकका वध और विराटकी पराजय तथा अर्जुनसे पराजित होकर अलम्बुषका पलायन संजय उवाच सहदेवमथायान्तं द्रोणप्रेप्सु विशाम्पते । कर्णो वैकर्तनो युद्धे वारयामास भारत,संजय कहते हैं--प्रजानाथ! भरतनन्दन! द्रोणाचार्यकी लक्ष्य करके आते हुए सहदेवको युद्धस्थलमें वैकर्तन कर्णने रोका
sañjaya uvāca | sahadevam athāyāntaṃ droṇaprepsu viśāṃpate | karṇo vaikatano yuddhe vārayāmāsa bhārata ||
సంజయుడు పలికెను—హే నరాధిపా, హే భారతవంశజా! ద్రోణుని చేరదలచి ముందుకు సాగుతున్న సహదేవుని యుద్ధభూమిలో వైకర్తన కర్ణుడు అడ్డగించాడు।
संजय उवाच