Droṇa–Arjuna Yuddha; Trigarta-Āvaraṇa; Bhīmasena Gajānīka-bheda
Droṇa and Arjuna Engage; Trigarta Containment; Bhīma Breaks the Elephant Corps
वारयस्व रणे यत्तो मिषतां सर्वधन्विनाम् | “महाराज! तुम रणदुर्मद घटोत्कचका सामना करनेके लिये शीघ्र जाओ और समस्त धनुर्धरोंके देखते-देखते प्रयत्नपूर्वक उसे रणक्षेत्रमें आगे बढ़नेसे रोको || १७ है ।। राक्षसं क्रूरकर्माणं यथेन्द्रस्तारकं पुरा,कथयामास दुर्धर्षो विनि:श्वस्य पुनः पुनः । संजय कहते हैं--महाराज! शत्रुओंको संताप देनेवाला राजा दुर्योधन उस महान् युद्धमें एक राक्षसके द्वारा प्राप्त हुई अपनी पराजयको नहीं सह सका। उसने गंगानन्दन भीष्मजीके पास जाकर उन्हें विनीतभावसे प्रणाम करनेके पश्चात् सारा वृत्तान्त यथावत् रूपसे कह सुनाया। उस दुर्धर्ष वीरने बारंबार लम्बी साँस खींचकर घटोत्कचकी विजय और अपनी पराजयकी कथा कही 'पूर्वकालमें इन्द्रने जैसे तारकासुरकी प्रगति रोक दी थी, उसी प्रकार तुम भी उस क्रूरकर्मा राक्षसको रोक दो। परंतप! तुम्हारे पास दिव्य अस्त्र हैं। तुममें पराक्रम भी महान् है और पूर्वकालमें बहुत-से देवताओंके साथ तुम्हारा युद्ध भी हो चुका है
vārayasva raṇe yatto miṣatāṁ sarva-dhanvinām | rākṣasaṁ krūra-karmāṇaṁ yathendraḥ tārakaṁ purā, kathayāmāsa durdharṣo viniḥśvasya punaḥ punaḥ |
సంజయుడు పలికెను— “మహారాజా! రణానికి వెంటనే వెళ్లి, సమస్త ధనుర్ధరులు చూస్తుండగా, శ్రమపడి అతని ముందడుగును ఆపు. క్రూరకర్ముడైన ఆ రాక్షసుని పురాకాలంలో ఇంద్రుడు తారకుని గమనాన్ని ఆపినట్లే నీవు కూడా నిలువరించు.” అని చెప్పి, దుర్ధర్ష వీరుడు మళ్లీ మళ్లీ దీర్ఘ నిశ్వాసాలు విడిచుచూ ఘటోత్కచుని విజయం, తన పరాభవం పునఃపునః వివరించాడు।
संजय उवाच