Rajo-dhūli-saṃmūḍha-saṅgrāmaḥ
The Dust-Obscured Battle and Mutual Charges
तथैव वेदविच्छूरो ज्वलनार्कसमद्युति: । इन्द्रास्त्रविदमेयात्मा प्रपतन् समितिंजय:,अर्जुन वेदज्ञ, शौर्यसम्पन्न, अग्नि और सूर्यके समान तेजस्वी, इन्द्रास्त्रका ज्ञाता, अमेय आत्मबलसे सम्पन्न, वेगपूर्वक आक्रमण करनेवाला और बड़े-बड़े संग्रामोंमें विजय पानेवाला है। वह ऐसे-ऐसे अस्त्रोंका प्रयोग करता है, जिनका हलका-सा स्पर्श भी वज्रके समान कठोर है। महारथी अर्जुन अपने हाथमें सदा तलवार खींचे ही रहता है और उसका प्रहार करके विकट गर्जना करता है
tathaiva vedavic chūro jvalanārkasamadyutiḥ | indrāstravid ameyātmā prapatan samitiṃjayaḥ ||
అతడు వేదజ్ఞుడు, శౌర్యసంపన్నుడు, అగ్ని సూర్యులవలె తేజస్సుగలవాడు; ఇంద్రాస్త్రాలను తెలిసినవాడు; అపారమైన ఆత్మబలంతో యుక్తుడు; వేగంగా దూసుకెళ్లి దాడి చేసేవాడు, సమరాల్లో శత్రుసేనలను జయించేవాడు.
धृतराष्ट उवाच