भीष्मपतनविषये धृतराष्ट्रस्य प्रश्नाः | Dhṛtarāṣṭra’s Questions on Bhīṣma’s Fall
#5०3८5>- | अत । है पञ्चदशो<् ध्याय: संजयका युद्धके वृत्तान्तका वर्णन आरम्भ करना-- दुर्योधनका दुःशासनको भीष्मकी रक्षाके लिये समुचित व्यवस्था करनेका आदेश संजय उवाच त्वद्युक्तोडयमनुप्रश्नो महाराज यथाहसि । नतु दुर्योधने दोषमिममासंक्तुमहसि,संजयने कहा--महाराज! आपने जो ये बारंबार अनेक प्रश्न किये हैं, वे सर्वथधा उचित और आपके योग्य ही हैं; परंतु यह सारा दोष आपको दुर्योधनके ही माथेपर नहीं मढ़ना चाहिये
సంజయుడు అన్నాడు—మహారాజా, మీరు పదేపదే అడుగుతున్న ఈ ప్రశ్నలు పూర్తిగా సముచితమైనవే, మీకు తగినవే; అయితే ఈ మొత్తం దోషాన్ని దుర్యోధనుడి తలమీద మాత్రమే మోపకూడదు.
संजय उवाच