भीष्मस्य जलप्रार्थना — अर्जुनस्य पर्जन्यास्त्रप्रयोगः — दुर्योधनं प्रति सन्ध्युपदेशः
Bhīṣma’s request for water; Arjuna’s Parjanya-astra; counsel to Duryodhana on reconciliation
स तथा पीड्यमानोड<पि सर्वशस्त्रैर्महारथै: । मत्वा तृणेन तांस्तुल्यान् विचचार गतव्यथ:,उन महारथियोंद्वारा सब प्रकारके अस्त्र-शस्त्रोंसे पीड़ित किये जानेपर भी भीमसेन उन्हें तिनकोंके समान मानकर व्यथारहित हो विचरण करने लगे
sa tathā pīḍyamāno 'pi sarvaśastrair mahārathaiḥ | matvā tṛṇena tāṁs tulyān vicacāra gatavyathaḥ ||
మహారథులు విసిరిన అన్ని రకాల ఆయుధాలతో బాధింపబడుతున్నప్పటికీ భీమసేనుడు వారిని తృణసమానులుగా భావించి, వ్యథలేకుండా యుద్ధభూమిలో సంచరించసాగెను.
संजय उवाच