अध्याय ९ — धृतराष्ट्रस्य युधिष्ठिरं प्रति राजनित्युपदेशः
Dhṛtarāṣṭra’s Counsel on Royal Policy to Yudhiṣṭhira
समर्थास्त्रिदिवस्यापि पालने किं पुन: क्षिते: । “आप जो हमारी देख-रेख करनेके लिये हमें पाण्डवोंको सौंप रहे हैं, वह सब व्यर्थ है। ये पाण्डव तो स्वर्गका भी पालन करनेमें समर्थ हैं; फिर इस भूमण्डलकी तो बात ही क्या है
samarthās tridivasya api pālane kiṁ punaḥ kṣiteḥ |
వీరు దేవలోకాన్ని కూడా పాలించగల సమర్థులు; ఇక భూమండల పాలన గురించి ఏమని చెప్పాలి? అందువల్ల మా పర్యవేక్షణ కోసం వీరిని ఎవరికైనా అప్పగించాలనే ఆలోచన వ్యర్థమే.
वैशम्पायन उवाच