Gāndhārī’s Petition for a Vision of the Departed (गान्धार्याः प्रार्थना—दिव्यदर्शनप्रसङ्गः)
पम्प बछ। अं: अष्टात्रिशो&् ध्याय: नारदजीके सम्मुख युधिष्ठिरका धृतराष्ट्र आदिके लौकिक अग्निमें दग्ध हो जानेका वर्णन करते हुए विलाप और अन्य पाण्डवोंका भी रोदन युधिछिर उवाच तथा महात्मनस्तस्य तपस्युग्रे च वर्ततः । अनाथस्थेव निधन तिष्ठत्स्वास्मासु बन्धुषु,युधिष्ठिर बोले--भगवन्! हम-जैसे बन्धु-बान्धवोंके रहते हुए भी कठोर तपस्यामें लगे हुए महामना धृतराष्ट्रकी अनाथके समान मृत्यु हुई, यह कितने दुःखकी बात है?
Yudhiṣṭhira uvāca—bhagavan, mahātmanas tasya tapasy ugre ca vartataḥ | anāthasyeva nidhanaṃ tiṣṭhatsv asmāsu bandhuṣu ||
యుధిష్ఠిరుడు అన్నాడు—ఓ భగవాన్! మేము బంధువులమై జీవించి ఉండగానే, ఘోర తపస్సులో నిమగ్నుడైన మహాత్మ ధృతరాష్ట్రుడు అనాథుడిలా మరణించడం ఎంతటి దుఃఖకరం!
युधिछिर उवाच