Vyāsa’s Inquiry into Dhṛtarāṣṭra’s Tapas and the Identification of Vidura with Dharma
संदिषश् श्रेति कर्तव्यं प्रययुर्भतृभि: सह । द्रौपदी आदि समस्त कौरवस्त्रियोंने अपने श्वशुरको न्यायपूर्वक प्रणाम किया। फिर दोनों सासुओंने उन्हें गलेसे लगाकर आशीर्वाद दे, जानेकी आज्ञा दी और उन्हें उनके कर्तव्यका उपदेश भी दिया। तत्पश्चात् वे अपने पतियोंके साथ चली गयीं || ५०-५१ $ ।। ततः प्रजज्ञे निनदः सूतानां युज्यतामिति,तदनन्तर सारथियोंने 'रथ जोतो, रथ जोतो” की पुकार मचायी। फिर ऊँटोंके चिग्घाड़ने और घोड़ोंके हिनहिनानेकी आवाज हुई। इसके बाद अपने घरकी स्त्रियों, भाइयों और सैनिकोंके साथ राजा युधिष्छिर पुनः: हस्तिनापुर नगरको लौट आये
saṃdiśya śreṣṭhi kartavyaṃ prayayur bhrātṛbhiḥ saha | tataḥ prajajne ninadaḥ sūtānāṃ yujyatām iti |
కర్తవ్యమేమిటో ఉపదేశం పొందిన తరువాత వారు తమ భర్తలతో కలిసి బయలుదేరారు. అప్పుడు సారథుల మధ్య గొప్ప నినాదం లేచింది—“రథాలను జోడించండి! రథాలను జోడించండి!”
युधिछिर उवाच