Indra–Mataṅga Saṃvāda: On the rarity and responsibilities of Brāhmaṇya (इन्द्र-मतङ्ग संवादः)
भीष्म उवाच ब्राह्म॒ण्यं तात दुष्प्राप्यं वर्ण: क्षत्रादिभिस्त्रिभि: । परं हि सर्वभूतानां स्थानमेतद् युधिछ्िर,भीष्मजीने कहा--तात युधिष्ठिर! क्षत्रिय आदि तीन वर्णोके लिये ब्राह्मणत्व प्राप्त करना अत्यन्त कठिन है, क्योंकि यह समस्त प्राणियोंके लिये सर्वोत्तम स्थान है
భీష్ముడు అన్నాడు—తాత యుధిష్ఠిరా! క్షత్రియాది మూడు వర్ణాలకు బ్రాహ్మణత్వం పొందడం అత్యంత దుర్లభం; ఎందుకంటే అది సమస్త ప్రాణులకు పరమోన్నత స్థానం.
भीष्म उवाच