अहिंसयित्वा ब्रह्महत्याविधानम् / Brahmahatyā incurred without physical violence
भीष्म उवाच आदिष्टिनो ये राजेन्द्र ब्राह्मणा वेदपारगा: । भुज्जते ब्रह्म॒कामाय व्रतलुप्ता भवन्ति ते,भीष्मजीने कहा--राजेन्द्र! (जिन्हें गुरुने नियत वर्षोंतक ब्रह्मचर्य-व्रत पालन करनेका आदेश दे रखा है वे आदिष्टी कहलाते हैं।) ऐसे वेदके पारड़त आदिष्टी ब्राह्मण यदि यजमानकी ब्राह्मणको दान देनेकी इच्छापूर्तिके लिये श्राद्धमें भोजन करते हैं तो उनका अपना ही व्रत नष्ट हो जाता है (इससे दाताका दान दूषित नहीं होता है)-
bhīṣma uvāca | ādiṣṭino ye rājendra brāhmaṇā vedapāragāḥ | bhuñjate brahmakāmāya vrataluptā bhavanti te ||
భీష్ముడు అన్నాడు—రాజేంద్రా! గురువాజ్ఞచే నిర్దిష్ట కాలం బ్రహ్మచర్య వ్రతంలో బద్ధులై, వేదపారంగతులైన ‘ఆదిష్టి’ బ్రాహ్మణులు యజమాని బ్రాహ్మణదానం చేయాలనే కోరిక తీరాలని శ్రాద్ధంలో భుజిస్తే, వారి స్వవ్రతమే భంగమవుతుంది; దోషం భుజించేవారిదే, దాత ఉద్దేశించిన దానానిది కాదు.
भीष्म उवाच